मुरादाबाद, जिसे दुनिया भर में "पीतल नगरी" (Brass City) के नाम से जाना जाता है, उसकी कहानी सदियों पुरानी और बेहद दिलचस्प है।
1. नींव और इतिहास
मुरादाबाद की बुनियाद 1625 में मुगल सम्राट शाहजहाँ के शासनकाल में गवर्नर रुस्तम खान ने रखी थी। इसका नाम शाहजहाँ के बेटे मुराद बख्श के नाम पर रखा गया। कहा जाता है कि कुछ माहिर कारीगर ईरान और अफगानिस्तान से यहाँ आए और स्थानीय कारीगरों के साथ मिलकर इस फन (कला) को नए रंग दिए।
आज़ादी के बाद, मुरादाबाद ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। सरकार की तरफ से सहयोग मिला और तकनीक में वृद्धि हुई।
आज मुरादाबाद से हर साल ₹8,000 से ₹10,000 करोड़ तक का माल अमेरिका, यूरोप और खाड़ी देशों में निर्यात होता है।
मुरादाबाद की असली पहचान नक्काशी , हाथ से बारीक डिजाइन बनाना ही मुरादाबाद की असली जान है। लेकिन कारीगरों को कुछ मुश्किलों का सामना भी करना पड़ रहा है पीतल महँगा हो गया है और नक्काशी का काम कम हो गया है।
ब्रांड Elita की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट Anthem Industries Pvt. Ltd. इनके लिए प्रयास कर रही है। यही नक्काशी हमारी यूएसपी है।
Elita ब्रांड के उत्पाद खरीदकर आप भी उनकी मदद कर पाएंगे और यह कला जीवित रहेगी।